UPI के नियम बदले, अब ट्रांजैक्शन से पहले जान लें ये 5 बातें UPI Payment New Rules

By shruti

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UPI Payment New Rules

UPI Payment New Rules: भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूपीआई सिस्टम में साल 2026 से कई अहम बदलाव लागू कर दिए गए हैं। इन नए नियमों का मकसद यूपीआई को पहले से ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और उपयोगकर्ता-हितैषी बनाना है। बीते कुछ वर्षों में यूपीआई ट्रांजेक्शन में जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ-साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी देखी गई थी। इसी चुनौती को देखते हुए National Payments Corporation of India ने सभी बैंकों और पेमेंट ऐप्स के लिए New UPI Rules 2026 को अनिवार्य किया है।

इन नियमों के लागू होने से आम उपभोक्ताओं से लेकर छोटे दुकानदारों और बड़े व्यापारियों तक, सभी को अधिक सुरक्षित डिजिटल लेनदेन का लाभ मिलेगा।

New UPI Rules 2026 लाने की जरूरत क्यों पड़ी

पिछले दो-तीन सालों में फर्जी क्यूआर कोड, नकली पेमेंट लिंक, फिशिंग कॉल और झूठे कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों को ठगा गया। कई मामलों में लोगों ने अनजाने में अपनी यूपीआई पिन या ओटीपी साझा कर दिए, जिससे उनके खाते खाली हो गए। साइबर अपराध से जुड़ी एजेंसियों के अनुसार ऐसे मामलों में कई गुना वृद्धि हुई थी।

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इसी पृष्ठभूमि में New UPI Rules 2026 को तैयार किया गया, ताकि डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाकर लोगों का भरोसा कायम रखा जा सके और कैशलेस अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

ट्रांजेक्शन लिमिट में किया गया बदलाव

New UPI Rules 2026 के तहत लेनदेन सीमा को उपयोगकर्ता की श्रेणी के अनुसार दोबारा निर्धारित किया गया है।

व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए अब एक दिन में अधिकतम एक लाख रुपये तक का यूपीआई ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। छोटे व्यापारियों के लिए यह सीमा डेढ़ लाख रुपये और बड़े व्यापारियों के लिए दो लाख रुपये तय की गई है। प्रीमियम और गोल्ड/प्लेटिनम खाताधारकों के लिए इससे ज्यादा सीमा रखी गई है, लेकिन उनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा शर्तें भी लागू होंगी।

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इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर किसी खाते से धोखाधड़ी होती भी है, तो नुकसान सीमित रहे। ये सीमाएं Reserve Bank of India के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं।

दो स्तरीय सत्यापन अब अनिवार्य

New UPI Rules 2026 का सबसे अहम बदलाव दो-स्तरीय प्रमाणीकरण है। अब बड़े लेनदेन केवल यूपीआई पिन से पूरे नहीं होंगे। तय सीमा से ज्यादा राशि भेजने पर ओटीपी या बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा।

फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या आईरिस स्कैन जैसे विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यदि किसी को आपकी यूपीआई पिन पता भी चल जाए, तब भी वह बिना आपकी पहचान सत्यापित किए पैसे नहीं निकाल सके। इस तकनीकी ढांचे के विकास में National Informatics Centre की अहम भूमिका रही है।

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संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत रोक

New UPI Rules 2026 के तहत अब यूपीआई सिस्टम पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गया है। यदि खाते में अचानक असामान्य गतिविधि नजर आती है, जैसे बहुत कम समय में कई ट्रांजेक्शन या अजीब समय पर बड़ी रकम का लेनदेन, तो सिस्टम अपने आप यूपीआई को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर देगा।

ऐसी स्थिति में उपयोगकर्ता को तुरंत एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचना दी जाएगी। खाते को दोबारा चालू कराने के लिए बैंक से संपर्क कर पहचान सत्यापित करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे धोखाधड़ी की पहचान पहले ही हो सके।

क्यूआर कोड रजिस्ट्रेशन हुआ जरूरी

अब तक फर्जी क्यूआर कोड के जरिए बड़ी संख्या में ठगी के मामले सामने आए थे। इसी को रोकने के लिए New UPI Rules 2026 में सभी मर्चेंट क्यूआर कोड का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।

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हर क्यूआर कोड में व्यवसाय का सही नाम, श्रेणी और आवश्यक पंजीकरण विवरण दिखना जरूरी होगा। भुगतान करते समय ग्राहक को प्राप्तकर्ता की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी। यदि कोई विवरण संदिग्ध लगे, तो भुगतान करने से पहले सतर्क रहना आसान होगा। इस प्रक्रिया में Goods and Services Tax Network से भी तालमेल रखा गया है।

रिफंड और शिकायत प्रक्रिया में सुधार

New UPI Rules 2026 में उपभोक्ता अधिकारों को खास महत्व दिया गया है। गलत या असफल लेनदेन की स्थिति में अब 24 घंटे के भीतर रिफंड प्रक्रिया शुरू करनी होगी। धोखाधड़ी के प्रमाण मिलने पर पूरी राशि लौटाने की व्यवस्था की गई है।

हर बैंक और पेमेंट ऐप को एक समर्पित शिकायत अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य है। अगर तीन दिनों में शिकायत का समाधान नहीं होता, तो संबंधित संस्था पर जुर्माना लगाया जा सकता है। उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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नई सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल

इन नए नियमों में आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि ट्रांजेक्शन डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे। ब्लॉकचेन तकनीक से लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित और पारदर्शी बनेगा।

इसके अलावा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, वॉइस और फेस रिकग्निशन, और टोकनाइजेशन जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इन सभी तकनीकों को Ministry of Electronics and Information Technology की मंजूरी प्राप्त है।

आम उपयोगकर्ताओं को क्या करना चाहिए

New UPI Rules 2026 का लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपनी सभी पेमेंट ऐप्स अपडेट रखनी होंगी। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल सही और सक्रिय होने चाहिए। बायोमेट्रिक सेटिंग्स चालू करें और मजबूत यूपीआई पिन का इस्तेमाल करें।

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किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और कभी भी अपनी पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। हर ट्रांजेक्शन के बाद अलर्ट जरूर जांचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।

व्यापारियों के लिए जरूरी निर्देश

व्यापारियों और दुकानदारों को अपने क्यूआर कोड का पंजीकरण समय पर कराना होगा। व्यवसाय से जुड़ी जानकारी सही होनी चाहिए और डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना होगा। ग्राहकों को भुगतान की रसीद देना और पारदर्शी रिफंड प्रक्रिया अपनाना भी जरूरी है।

नियमों का पालन न करने पर जुर्माना या व्यवसाय लाइसेंस रद्द होने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

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New UPI Rules 2026 से मिलने वाले फायदे

इन नए नियमों से डिजिटल भुगतान पहले से ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनेंगे। धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी और उपभोक्ताओं को त्वरित रिफंड से राहत मिलेगी। छोटे व्यापारियों में भी ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा।

शुरुआत में कुछ नियम असुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगे।

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