North India Weather Alert: पूरे भारत में इस समय मौसम के अलग-अलग और तीखे रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं कड़ाके की ठंड ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है तो कहीं बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन को मुश्किल बना दिया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बर्फीली हवाओं के चलते तापमान शून्य के आसपास पहुंच गया है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भारी हिमपात की चेतावनी जारी की गई है। आने वाले 10 से 12 दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं, क्योंकि एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ पूरे क्षेत्र के मौसम पैटर्न को बदलने वाला है।
पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवाओं की दिशा और गति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह सिस्टम उत्तर भारत में ठंड से कुछ समय के लिए राहत तो देगा, लेकिन इसके साथ बारिश, बर्फबारी और बाद में फिर से तेज ठंड का रास्ता भी साफ करेगा। जनवरी के मध्य में मौसम थोड़ी नरमी दिखा सकता है, मगर महीने के अंतिम सप्ताह में सर्दी दोबारा अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है।
मैदानी इलाकों में शीतलहर का कहर
उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में इस समय शीतलहर अपने चरम पर है। राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया है। कई शहरों में रात का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला गया, जिससे लोगों को सुबह और रात के समय घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। ठंडी और तेज हवाओं ने ठिठुरन को और बढ़ा दिया है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में घना कोहरा फिलहाल कम जरूर हुआ है, लेकिन हवा में नमी और ठंडक के कारण सर्दी का असर कम नहीं हुआ है। 16 जनवरी तक उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं चलती रहेंगी, जिससे जनजीवन, खासकर बुजुर्गों और बच्चों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अलर्ट
हिमालयी क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण हालात
पहाड़ी राज्यों के लिए आने वाले 10 दिन बेहद कठिन साबित हो सकते हैं। 16 जनवरी से हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू होने की संभावना है, जो रुक-रुक कर 25 जनवरी तक जारी रह सकता है। खासतौर पर 22, 23 और 24 जनवरी को भारी से बहुत भारी बर्फबारी होने की चेतावनी दी गई है।
इस दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में कई फीट तक बर्फ जमा हो सकती है, जिससे सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बढ़ जाएगा। प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के बंद होने की आशंका है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी हो सकती है।
भूस्खलन और हिमस्खलन का खतरा
लगातार हो रही बर्फबारी के कारण भूस्खलन और हिमस्खलन का जोखिम भी काफी बढ़ जाएगा। प्रशासन ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे इन तारीखों के दौरान पहाड़ी इलाकों की यात्रा से बचें। स्थानीय निवासियों को भी सतर्क रहने और मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।
मध्य और पश्चिम भारत में बारिश की संभावना
चक्रवाती हवाओं का असर
पश्चिमी विक्षोभ के साथ-साथ अरब सागर से आने वाली नमी के कारण पश्चिम भारत के ऊपर चक्रवाती हवाओं का एक क्षेत्र विकसित हो सकता है। इसके प्रभाव से 23 और 24 जनवरी को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। यह बारिश फसलों के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकती है, लेकिन ठंड के साथ मिलकर तापमान में उतार-चढ़ाव बढ़ा देगी।
दिल्ली-एनसीआर में बदलेगा तापमान
18 जनवरी के आसपास दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश की गतिविधियां संभव हैं। इससे दिन और रात के तापमान में बदलाव आएगा। जहां एक ओर न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है, वहीं अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
हवाओं की दिशा बदलने से मिलेगी अस्थायी राहत
17 और 18 जनवरी से उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का प्रभाव कमजोर पड़ने लगेगा। उनकी जगह दक्षिण-पूर्वी दिशा से अपेक्षाकृत गर्म और नमी वाली हवाएं चलेंगी। इसके चलते न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी और लोगों को भीषण ठंड से कुछ राहत मिलेगी।
दिल्ली, राजस्थान और मध्य भारत के वे इलाके जहां तापमान शून्य के करीब पहुंच गया था, वहां पारा कुछ डिग्री ऊपर चढ़ सकता है। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं होगी और केवल कुछ दिनों तक ही बनी रहेगी।
गणतंत्र दिवस के बाद फिर लौटेगी कड़ाके की सर्दी
ताजा बर्फ से आएंगी बर्फीली हवाएं
25 जनवरी के बाद जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ का असर कमजोर होगा, पहाड़ों पर जमी ताजी बर्फ से होकर आने वाली ठंडी हवाएं एक बार फिर मैदानी इलाकों की ओर बढ़ेंगी। इससे जनवरी के अंतिम दिनों में सर्दी का दूसरा और अधिक तीव्र दौर शुरू होने की संभावना है।
तापमान में फिर होगी भारी गिरावट
इस दौर में तापमान में दोबारा तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। रातें बेहद ठंडी होंगी और सुबह के समय पाला पड़ने की आशंका भी रहेगी। यह स्थिति खासतौर पर किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है, क्योंकि फसलों को ठंड से नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों को ठंड और पाले से बचाने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाएं। आम नागरिकों को भी गर्म कपड़े पहनने, सुबह-शाम अनावश्यक बाहर निकलने से बचने और मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, जनवरी का दूसरा पखवाड़ा मौसम के लिहाज से उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। जहां कुछ दिन राहत देंगे, वहीं महीने के अंत में ठंड एक बार फिर अपनी पूरी ताकत के साथ लौट सकती है। ऐसे में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है।









