बर्फबारी कम लेकिन ठंड ज्यादा क्यों पड़ रही है? जानिए मौसम का पूरा गणित Weather Mystery Explained

By shruti

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Weather Mystery Explained

Weather Mystery Explained: उत्तर भारत इस समय सर्दियों के सबसे कठोर दौर से गुजर रहा है। जनवरी के मध्य में ठंड ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लंबे समय से जारी शीतलहर (कोल्ड वेव) ने तापमान को सामान्य से कई डिग्री नीचे धकेल दिया है। हालात यह हैं कि जहां पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी अपेक्षा से कम हुई है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में सूखी और तीखी ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मैदानों से पहाड़ों तक ठंड का कहर

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार कई दिनों से कोल्ड वेव और कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है। दिन में धूप कमजोर रहने के कारण ठंड का असर और भी ज्यादा महसूस किया जा रहा है। रात और सुबह के समय घना कोहरा सड़कों, रेल और हवाई यातायात को भी प्रभावित कर रहा है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के चलते आम लोगों को अलाव और हीटर का सहारा लेना पड़ रहा है।

डल झील का जमना बना ठंड की गंभीरता का संकेत

इस भीषण सर्दी का सबसे बड़ा संकेत कश्मीर घाटी से सामने आया है। पर्याप्त बर्फबारी न होने के बावजूद तापमान में लगातार आई गिरावट के कारण श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील पूरी तरह जम गई है। झील की सतह पर जमी मोटी बर्फ यह दिखाती है कि ठंड कितनी तीव्र हो चुकी है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे दर्ज किया गया, जिससे पाइपलाइन, जलस्रोत और दैनिक जीवन पर असर पड़ा है। स्थानीय लोग इसे हाल के वर्षों की सबसे कठोर सर्दियों में से एक मान रहे हैं।

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मैदानी इलाकों में शून्य डिग्री के करीब तापमान

केवल पहाड़ ही नहीं, बल्कि मैदानी इलाकों में भी तापमान ने चौंकाने वाले आंकड़े छुए हैं। पंजाब के कुछ हिस्सों में इस सीजन पहली बार न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पारा 1 डिग्री से नीचे या उसके आसपास रहा। दिल्ली में भी लगातार कई दिनों से न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है, जिससे सुबह-शाम की ठंड असहनीय हो गई है। ठंड के कारण स्कूलों के समय में बदलाव और निर्माण कार्यों में भी बाधा देखी जा रही है।

क्या होती है कोल्ड वेव और कोल्ड डे की स्थिति

आम तौर पर जब मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस या उससे कम हो जाता है, तो उसे शीतलहर या कोल्ड वेव की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं कोल्ड डे की स्थिति दिन के तापमान से जुड़ी होती है। जब घने कोहरे या बादलों की वजह से सूरज की किरणें जमीन तक नहीं पहुंच पातीं और दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 4 से 5 डिग्री कम रहता है, तब कोल्ड डे घोषित किया जाता है। इस समय उत्तर भारत के कई राज्यों में कोल्ड वेव और कोल्ड डे दोनों का असर एक साथ देखने को मिल रहा है।

बारिश और बर्फबारी की कमी ने बढ़ाई सूखी ठंड

इस सर्दी का एक और महत्वपूर्ण पहलू है बारिश और बर्फबारी की भारी कमी। सामान्य तौर पर दिसंबर और जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में अच्छी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में हल्की बारिश होती है। लेकिन इस साल स्थिति अलग रही। दिसंबर महीने में पहाड़ी राज्यों में सामान्य से 90 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में तो लगभग पूरी तरह सूखा रहा। जनवरी के पहले पखवाड़े में भी यही रुझान बना रहा, जिससे वातावरण में नमी की भारी कमी हो गई।

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कृषि पर पड़ रहा है सीधा असर

बारिश और बर्फबारी की कमी का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। नमी न होने के कारण फसलों में पाले का खतरा बढ़ गया है। गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं। अत्यधिक ठंड और पाला फसल की बढ़वार को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई इलाकों में किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और धुएं का सहारा ले रहे हैं।

अगले 10 दिनों का मौसम पूर्वानुमान

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले 1-2 दिनों में शीतलहर की तीव्रता में हल्की कमी आ सकती है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी। मध्य जनवरी के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है, जिससे ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इसका असर मैदानी इलाकों में बादल और हल्की बूंदाबांदी के रूप में देखने को मिल सकता है।

19 जनवरी के बाद बदल सकता है मौसम का मिजाज

वास्तविक बदलाव 19 जनवरी के बाद देखने को मिल सकता है, जब एक अधिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में प्रवेश करेगा। इसके प्रभाव से 22 से 25 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी से भारी बर्फबारी हो सकती है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में बारिश की संभावना बढ़ जाएगी। इस बारिश से ठंड के स्वरूप में बदलाव आएगा और सूखी ठंड की जगह नम और चुभने वाली सर्दी महसूस हो सकती है।

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गणतंत्र दिवस पर मौसम की भूमिका

जनवरी के अंत में होने वाली बारिश और बर्फबारी का असर 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौसम पर भी पड़ सकता है। यदि 23 और 24 जनवरी के आसपास दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बारिश होती है, तो गणतंत्र दिवस के दिन ठंड और नमी दोनों अधिक रह सकती हैं। हालांकि मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है, इसलिए अंतिम स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

फिलहाल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

जब तक मौसम पूरी तरह से करवट नहीं लेता, तब तक ठंड से बचाव के उपाय बेहद जरूरी हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पर्याप्त गर्म कपड़े, गरम भोजन और समय-समय पर मौसम अपडेट पर नजर रखना इस कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर तरीका है।

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